अपना कर्म निभाता चल रहा हूं डगर पे I हर एक की खबर रखता हूं अपनी नजर पे । अपना कर्म निभाता चल रहा हूं डगर पे I हर एक की खबर रखता हूं अपनी नजर पे ।
भरोसा खुद पर रखो तो ताकत बन जाती हो। भरोसा खुद पर रखो तो ताकत बन जाती हो।
सोचता कुछ हूँ काम मैं कुछ और करता हूँ। सोचता कुछ हूँ काम मैं कुछ और करता हूँ।
कुछ तो माजरा है यारों, लॉक डाउन कुछ और है, कड़ाई कुछ और है ! कुछ तो माजरा है यारों, लॉक डाउन कुछ और है, कड़ाई कुछ और है !
बहुत क़रीब से अक्सर समझ नहीं आता। बहुत क़रीब से अक्सर समझ नहीं आता।
कल रात फिर बुन रहा था कुछ लफ़्ज़ मन के भीतर। कल रात फिर बुन रहा था कुछ लफ़्ज़ मन के भीतर।